25 मार्च 2026
Buyback Tax Surcharge
Buyback Tax Surcharge को लेकर बड़ा फैसला सामने आया है, जहां लोकसभा ने फाइनेंस बिल 2026 को 32 संशोधनों के साथ पास कर दिया है। इस संशोधन में शेयर बायबैक से होने वाले कैपिटल गेन पर 12% का फ्लैट सरचार्ज लगाने का प्रस्ताव शामिल है। यह कदम सीधे तौर पर व्यक्तिगत और कॉर्पोरेट निवेशकों के टैक्स बोझ को बढ़ाने वाला माना जा रहा है। अब यह बिल राज्यसभा में पास होने के बाद कानून का रूप लेगा।
सरल भाषा में समझें तो अब कंपनियों द्वारा अपने शेयर वापस खरीदने यानी buyback पर मिलने वाले लाभ पर निवेशकों को पहले से ज्यादा टैक्स देना पड़ सकता है। पहले टैक्स स्लैब के हिसाब से सरचार्ज लगता था, लेकिन अब 12% का फ्लैट सरचार्ज लागू करने का प्रस्ताव है, जिससे टैक्स का बोझ समान रूप से बढ़ेगा।
ग्राउंड लेवल पर बात करें तो छोटे निवेशकों के बीच इस फैसले को लेकर चिंता दिख रही है। दिल्ली और मुंबई के कुछ ब्रोकर्स का कहना है कि “जो लोग छोटे-छोटे शेयरों में निवेश करते हैं, उनके लिए buyback एक अच्छा मौका होता था, लेकिन अब टैक्स ज्यादा होने से आकर्षण कम हो सकता है।”
फाइनेंस बिल 2026 में पहले ही यह प्रस्ताव रखा गया था कि buyback से होने वाली आय को कैपिटल गेन के रूप में टैक्स किया जाएगा। सरकार का तर्क है कि कुछ प्रमोटर्स टैक्स बचाने के लिए buyback का इस्तेमाल कर रहे थे, जिसे रोकने के लिए यह कदम जरूरी था।
इस नए संशोधन के बाद प्रमोटर्स पर अतिरिक्त टैक्स भी लागू होगा। सरकार के अनुसार, इससे कॉर्पोरेट प्रमोटर्स के लिए प्रभावी टैक्स करीब 22% तक और गैर-कॉर्पोरेट प्रमोटर्स के लिए लगभग 30% तक पहुंच सकता है। इसका मतलब साफ है कि अब कंपनियों के लिए buyback करना पहले जितना सस्ता नहीं रहेगा।
टैक्स विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव निवेश के तरीके को प्रभावित कर सकता है। M&A टैक्स एक्सपर्ट संदीप झुनझुनवाला के अनुसार, “फ्लैट 12% सरचार्ज से टैक्स आउटगो बढ़ेगा और यह buyback को डिविडेंड के मुकाबले कम आकर्षक बना सकता है।”
अगर इसे एक आम उदाहरण से समझें तो पहले 50 लाख रुपये तक की आय पर कोई सरचार्ज नहीं था। 50 लाख से 1 करोड़ तक 10% सरचार्ज लगता था। लेकिन अब हर स्तर पर 12% सरचार्ज लागू होने से छोटे और मध्यम निवेशकों पर सीधा असर पड़ेगा।
हालांकि एक दिलचस्प बात यह भी है कि बड़े निवेशकों के लिए यह बदलाव थोड़ा राहत भी दे सकता है। जिन मामलों में आय 1 करोड़ से ज्यादा होती है, वहां पहले 15% तक सरचार्ज लगता था, जो अब घटकर 12% हो जाएगा। यानी बड़े सौदों में थोड़ा फायदा मिल सकता है।
कॉर्पोरेट सेक्टर में भी इस फैसले के अलग-अलग असर देखने को मिल सकते हैं। जिन कंपनियों की आय 1 करोड़ रुपये से कम है, उन्हें अब पहले के मुकाबले ज्यादा टैक्स देना होगा। वहीं 1 से 10 करोड़ की आय वाले मामलों में भी बदलाव का असर पड़ेगा।
इस बीच फाइनेंस बिल में एक और अहम संशोधन किया गया है, जो इनकम टैक्स से जुड़े मामलों पर लागू होगा। इसमें कहा गया है कि इलेक्ट्रॉनिक तरीके से जारी किए गए नोटिस या आदेश को केवल तकनीकी कारणों से अमान्य नहीं माना जाएगा।
इस संशोधन को 1 अप्रैल 2021 से लागू माना जाएगा, यानी इसका असर पिछले मामलों पर भी पड़ेगा। इसका मतलब यह है कि जिन मामलों में पहले तकनीकी आधार पर राहत मिल सकती थी, अब वह रास्ता बंद हो सकता है।
टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह बदलाव सरकार की ओर से एक “सुधारात्मक कदम” है, जिससे पहले जारी किए गए इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेजों की वैधता बनी रहेगी। लेकिन इससे उन टैक्सपेयर्स को नुकसान हो सकता है, जिन्होंने तकनीकी खामियों के आधार पर अपने केस में राहत की उम्मीद की थी।
ग्राउंड रिपोर्ट बताती है कि कई चार्टर्ड अकाउंटेंट्स इस बदलाव को लेकर अपने क्लाइंट्स को पहले ही सतर्क कर रहे हैं। उनका कहना है कि अब टैक्स प्लानिंग करते समय ज्यादा सावधानी बरतनी होगी।
इसके अलावा डायरेक्टर आइडेंटिफिकेशन नंबर (DIN) से जुड़ा एक और संशोधन भी चर्चा में है, जिसे 2019 से लागू माना जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल DIN का उल्लेख न होने के कारण किसी असेसमेंट को रद्द न किया जाए।
अगर पूरे परिप्रेक्ष्य में देखें तो सरकार का मकसद टैक्स सिस्टम को मजबूत बनाना और loopholes को बंद करना है। लेकिन इसका असर निवेशकों की रणनीति पर जरूर पड़ेगा।
अब सवाल यह है कि क्या निवेशक buyback से दूरी बनाएंगे? कई विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर टैक्स ज्यादा बढ़ता है, तो कंपनियां और निवेशक दोनों डिविडेंड को ज्यादा प्राथमिकता दे सकते हैं।
निष्कर्ष के तौर पर कहा जा सकता है कि Buyback Tax Surcharge का यह नया प्रस्ताव भारतीय शेयर बाजार के लिए एक बड़ा बदलाव है। इससे निवेश के तरीके, कंपनियों की रणनीति और टैक्स प्लानिंग – तीनों पर असर पड़ेगा।
अब सभी की नजर राज्यसभा पर है, जहां इस बिल को मंजूरी मिलनी बाकी है। अगर वहां से भी हरी झंडी मिलती है, तो आने वाले समय में शेयर बाजार की दिशा और निवेशकों का व्यवहार दोनों बदल सकते हैं।



